Thursday, September 22, 2016

इप्टा जम्मू कश्मीर की दो एकल प्रस्तुतियां

इप्टा जम्मू कश्मीर इकाई ने 20 सितंबर 2016 को के.एल. सहगल सभागार में दो एकल प्रस्तुतियां दी।पहली प्रस्तुति गुलज़ार की "रावी पार"पर आधारित थी।

प्रस्तुति का कथानक बँटवारे के समय को दर्शाता है।सरदार दर्शन सिंह भी पाकिस्तान से विस्थापित हो कर अपनी पत्नी के साथ हिन्दोस्तान आ रहा है। दो जुड़वाँ बच्चे उस के साथ हैं ।एक बच्चे की  मौत रास्ते में हो जाती है। जब गाडी रावी का पुल पार कर रही होती है, दर्शन सिंह मृत बच्चे को रावी में फेंक देता है। लेकिन बाद में उसे एहसास होता है कि मृत बच्चे के जगह उसने जीवित बच्चे को फैंक दिया है।

इस एकल की परिकल्पना एवं प्रस्तुति इप्टा के साथी दीपक विर्दी  की थी। शाम की दूसरी प्रस्तुति डॉ.बलजीत रैना की कहानी " अजब देश की" पर आधारित थी। कहानी एक पात्र बेली राम के इर्द गिर्द घूमती है जिसे बार बार किसी न किसी वजह से धर्म परिवर्तन करना पड़ता है। अन्ततः वो सिख धर्मअपना लेता है। पर उसे उग्रवादी होने के शक में गिरफ्तार कर लिया जाता है। अदालत उसे निर्दोश मानती है और वो वापिस अपने गाँव जाने के लिए ट्रेन पकड़ता है पर रास्ते में ही दंगाई उसे उग्रवादि समझ कर ज़िंदा जला दिया जाता है। मनोज भट द्वारा इस नाटक को निर्देशित संजय ने किया था।

Monday, September 19, 2016

डॉ. जितेंद्र रघुवंशी के 66वें जन्मदिन पर समर्पित नाट्य प्रस्तुति 'कन्यादान'

दो माह के अथक परश्रम के बाद विजय तेंदुलकर कृत नाटक 'कन्यादान' का मंचन 16 सितम्बर 2106 को आगरा के सूरसदन प्रेक्षागृह में हुआ. नाटक के चयन से लेकर उसके मंचन तक की प्रक्रिया के बीच कलाकार कई वैचारिक मतभेदों से गुज़रे. कई बार चर्चा इस मुक़ाम तक पहुँच जाती कि लगता इस स्क्रिप्ट को ड्रॉप कर के किसी और स्क्रिप्ट पर काम करते हैं. कुछ साथियों का सुझाव था की नाटक का अंत बदल दिया जाए लेकिन तब नाटककार के साथ न्याय ना होता. लम्बी कश्मकश के बाद ये तय हुआ की नाटक को पूरी ज़िम्मेदारी के साथ उसकी मूल स्क्रिप्ट के साथ ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया जाए और सही ग़लत का निर्णय दर्शकों पर छोड़ दिया जाए. आख़िर सामाजिक मुद्दों का समाधान समाज के बीच से ही आना चाहिए. अन्य गम्भीर नाटकों के तरह ही ' कन्यादान' के साथ भी ये डर लगातार बना हुआ था कि नाटक बोझिल ना हो जाए.

मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से 
रंगलोक सांस्कृतिक संस्थान की 
नाट्य प्रस्तुत 'कन्यादान'


बहरहाल, तमाम जटिलताएँ के साथ रिहर्सल चलता रहा. युवा साथी, मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल से स्नातक गरिमा मिश्रा ने निर्देशन की ज़िम्मेदारी को बख़ूबी निभाया.कम पात्रों वाले नाटक के चयन के समय ये विचार भी था कि अभिनेताओं को ख़ुद पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिले. कहना होगा कि बतौर अभिनेता गरिमा मिश्रा, प्रखर सिंह, रेनू मुस्कान, यश उप्रेती, शैलेंद्र यादव, रोहित राठोर ने दर्शकों को बांधे रखा.

नाट्य परिकल्पना व मंच परिकल्पना सारांश भट्ट की थी. सोचिए नाटक के मंचन के लिए पूर्व निर्धारित स्थान में 5 दिन पूर्व परिवर्तन हो जाए.. तब??? तब सारांश जैसे प्रशिक्षित कलाकार ही नैया पार लगा सकते हैं. मंच निर्माण में आकाश कुमार, रोहित राठोर, जितेंद्र चौहान, इमरान कुरेशी ने सहयोग किया.प्रकाश परिकल्पना व संचालन के लिए साथी भूषण शिम्पी हमारे साथ थे. भूषण मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित हैं और वर्तमान में मुंबई में स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं.

संगीत संयोजन व संचालन हर्षिता मिश्रा एवं धीरज मिश्रा ने संभाला.पूर्व में रंगलोक द्वारा मंचित नाटकों के चित्रों की ख़ूबसूरत प्रदर्शनी आकृति सारस्वत, संस्कार जोशी और इशिता भटनागर ने लगाई. दीपक जैन, डॉ. विजय शर्मा व अमन मित्तल जैसे साथियों के सहयोग से यह मंचन सफल हो सका.

कार्यक्रम का संचालन संयोजक, डिम्पी मिश्रा ने किया. प्रस्तुति के समय आयकर आयुक्त आगरा श्री अमित सिंह, हिंदुस्तान कॉलेज आफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ के निदेशक डॉ. नवीन गुप्ता, रंगलोक के संरक्षक डॉ. सुबोध दुबे, प्रख्यात कवयित्री डॉ. शशि तिवारी, वरिष्ठ रंग निर्देशक बसंत रावत, आदि गणमान्य दर्शक उपस्थित थे.

'विवेचना' जबलपुर का 23 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह 19 अक्टूबर से

विवेचना जबलपुर का तेइसवां राष्ट्रीय नाट्य समारोह आगामी 19 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2016 तक तरंग प्रेक्षागृह में आयोजित है। इस समारोह की खासियत इसमें मंचित नाटकों की भव्यता है। इस समारोह में मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय भोपाल का भव्य नाटक ’आनंद रघुनंदन’ प्रथम दिन मंचित होगा और समारोह का खास आकर्षण है। 19 अक्टूबर को उद्घाटन के अवसर पर होने जा रहे इस संगीतमय नाटक में 40 कलाकार हिस्सा लेंगे। रीवां के महाराजा द्वारा सन् 1830 में लिखे गए इस नाटक को पहली बार मंचित किया जा रहा है।  भव्य सैट और लाइट भोपाल से लाई जा रही हैं। यह नाटक श्रेष्ठ अभिनय, संगीत, अद्भुत कथानक और बघेली भाषा के लालित्य के लिए प्रसिद्ध हुआ है। इस नाटक  के निर्देशक श्री संजय  उपाध्याय  हैं।

 दूसरे दिन सुप्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार का लिखा नाटक ’एक कंठ विषपायी’ अनवरत थियेटर्स मुम्बई द्वारा मंचित किया जाएगा। इस काव्य नाटक का निर्देशन अशोक बांठिया ने किया है। अभी अभी पृथ्वी थियेटर्स मुम्बई में इस नाटक के मंचन बहुत सराहे गए हैं।

 समारोह के तीसरे दिन शेक्सपियर के नाटक ’मैकबेथ’ का मंचन शैडो माइम थियेटर ग्रुप भोपाल द्वारा किया जाएगा। मैकबेथ का यह मंचन युवा निर्देशक मनोज नायर के निर्देशन में होगा। मैकबेथ की मूल कृति में आज की परिस्थितियों के साथ मेल कर नया मैकबेथ तैयार किया गया है जहां मूल नाटक माइम में मंचित होगा और आज का मैकबेथ संवादों के साथ होगा।

 समारोह के चैथे दिन विख्यात नाट्य निर्देशक अवतार साहनी के नाटक ’एक तू और एक मैं’ का मंचन एक्टर्स रिपर्टरी थियेटर, दिल्ली द्वारा किया जाएगा। इस नाटक को सुनील सिन्हा व नरेन्द्र गुप्ता ने लिखा है। यह दो पात्री नाटक बहुत रोचक और मनोरंजक है।

 पांचवें और अंतिम दिन विवेचना थियेटर ग्रुप द्वारा मोतीलाल केमू के नाटक ’खोया हुआ गांव’ का मंचन किया जाएगा। नाटक का निर्देशन वसंत काशीकर ने किया है। यह नाटक गीत संगीत नृत्य के साथ पहाड़ी गांव के कलाकारों की कथा कहता है। मोतीलाल केमू जम्मू के वरिष्ठ नाटककार हैं। यह प्रथम अवसर है जब यह नाटक जम्मू के बाहर मंचित हो रहा है।

 विवेचना थियेटर ग्रुप जबलपुर के इस 23 वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह में भव्य संगीतमय नाटकों का मंचन होने जा रहा है। प्रतिदिन संध्या 7:30 बजे से तरंग आॅडीटोरियम में नाटक मंचित होंगे। विवेचना के हिमांशु राय, बांकेबिहारी ब्यौहार और वसंत काशीकर ने सभी नाट्य प्रेमियों से हर वर्ष के समान इस वर्ष भी नाट्य समारोह के सभी नाटकों को देखने का अनुरोध किया है।

Friday, September 16, 2016

जितेन्द्र रघुवंशी स्मृति समारोह-1

"पता नहीं ये कैसा जनमानस है जो व्यक्तिगत रूप से किसी और पक्ष और सार्वजानिक रूप से धर्मनिरपेक्ष नज़र आना चाहता है। संविधान में आज़ादी के बाद संशोधन किया गया और धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़ा गया क्योंकि तात्कालिक सत्ता भी  धर्मनिरपेक्ष हो या नही इस पर संदेह था " सत्ता के धर्मनिरपेक्ष स्वरुप पर बोलते हुए साहित्यकार विभूति नारायण राय ने आज जनमन विचार मंच की बैठक में अपने विचार व्यक्त किये पूर्व पुलिस अधिकारी रहे श्री राय ने एक सवाल के जबाव में कहा कि आज जो पुलिस का चेहरा नज़र आता है वो आज़ादी के पहले का ही वर्णवादी चेहरा है क्योंकि सत्ता के लिए वही सुविधाजनक था । हाशिमपुरा घटना के जांच अधिकारी रहे श्री राय ने कहा कि सत्ता और पुलिस हमको वही करती  है जो हम उसे करने देते हैं । इस सोच का निज़ाम न काबिले बर्दाश्त है । जितेन्द्र रघुवंशी स्मृति समारोह के क्रम में यह पहला कार्यक्रम था जो आज शाम शहीद स्मारक पर हुआ।

गोष्ठी में श्री राय के अतिरिक्त डॉ नसरीन बेगम डॉ ज्योत्स्ना रघुवंशी डॉ प्रियम अंकित डॉ विजय शर्मा श्री नवाब उदीन श्री प्रमोद सारस्वत डॉ राजाराम राजवीर सिंह राठौर ने अपने विचार व्यक्त किये ।गोष्ठी में युवाओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया जितेन्द्र जी पत्नी भावना रघुवंशी के अतिरिक्त उनकी बेटी सौम्या अभिषेक रघुवंशी मुम्बई से  फ़राज़ अहमद अलीगढ से शुभम सिंह बंगलौर से  , नदीम दिल्ली से आये हुए हैं जो कल समारोह में भी हिस्सा लेंगे । गौरव लहरी मीडिया से अपने सवालों के साथ थे । दलित सवालों को लेकर अर्जुन तेवतिया और अरुण कुमार भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के बाद फ्रेंड्स थिएटर ग्रुप की प्रस्तुति हुई जिसमें अनिल जैन द्वारा निर्देशित और लिखित नाटक पर्यावरण बचाओ के द्वारा जल जंगल ज़मीन के मसले पर आवाज़ उठाई गयी इस नाटक में  समीर सिंघल उमाशंकर जी सोमा जैन एस के जैन और सभी साथियों ने नाटक के जरिये रंगकर्मी जितेन्द्र रघुवंशी जी को याद किया इस अवसर पर श्री राजीव सिंघल श्री ओम शर्मा श्री सुदर्शन दुआ उपस्थित थे।

-विजय शर्मा 

Monday, September 5, 2016

One day organisational conference of IPTA J&K Chapter

One day organisational conference of IPTA J&K Chapter was held yesterday on 29th Aug 2016 at K L Saigal Hall, J&K Academy of art culture and languages. The presidium was shared by Com. Dr. G. S. Charak, Secy. CPI Jammu Region, Dr. Baljeet Singh Raina, eminent writer and Com. K. K. Kaushal, veteran trade union leader and progressive thinker.
A short play " Dekho Bandhu Dekho Bhaiya" written and directed by Vijay Malla was staged.
Later on in the second session elections were held. The outgoing body put forward a proposal ot the new body and that was unanimously accepted.
The new office bearers are as follows:
Chairman: Sh. Anil Chopra
President: Com. Hardeep Singh
Sr. Vice Presidents:
1. Mrs. Nirmal Kesar
2. Mr. Rajinder Khajuria
Vice Presidents:
1. Mr. Harjeet Singh
2. Mr. Manoj Bhat
Gen. Secy: Sanjay Gupta
Organizing Secy: Hariket Jij
Secy.: 1. Vikram Rajwal
             2. Anuroop Pathania
Asst. Secy. : Qurat Ul Ain.

The post of cashier was left open to be filled later on.  Sh. Ashwani pradhan was selected as Patron and Vijay Malla as advisor.The delegates elected for the conference included:
1. Anil Chopra
2. Hardeep Singh
3. Manoj Bhat
4. Ashwani Pradhan
In addition to the four alotted delegates , Sanjay Gupta and Vijay Malla will be ex- officio delegates.


-Sanjay Gupta
Gen. Secy
IPTA, J&K Chapter

Saturday, August 27, 2016

Fidel's 90th Birthday was celebrated in Indore

- Vineet Tiwari
On 13th August, 2016, Comrades from different organizations gathered together in Indore, a town of Madhya Pradesh to pay our respect to Com. Fidel Castro on his 90th birthday. We recalled his gallantry during guerilla warfare with Batista regime. It was a fight for democracy where Com. Fidel fought along with peasants and others from working class in the hills of Sierra Maestra. 
We remembered how Cuba set an example for the entire third world that independence and camaraderie can challenge the mightiest imperialist power of the world. 
We also remembered Com. Che Guevara, his contribution in building a new society in socialist Cuba. Fidel is not just a revolutionary charismatic leader for the Cuban people but he is the leader inspirational light house for the entire third world, from Mozambique and Angola to India and Nepal to Nicaragua to El Salvador to Bolivia to Ecuador and of course to Venezuela.
After the collapse of socialist regimes of Soviet Union and Eastern Europe and the breakdown of CMEA,  Cuba went through a very difficult period. Fidel said to his fellow country people, "History has bestowed upon us the responsibility to carry forward the legacy of socialist revolution. We are proud to get this opportunity and we shall not betray the cause for which we and our comrades have fought." And Indeed, Cuba emerged through the Special Period as a very special country. The people of Cuba along with Venezuela, Bolivia, Ecuador and other countries in Latin America have opened up new vistas for setting up democratic, participative, just and equitable society for human civilization. Speakers discussed about the world famous Cuban healthcare system and courageous Cuban doctors. We also saw Nobel Laureate famous writer Gabriel Garcia Marquez's interview in which he fondly described about Fidel's personality.
We salute Fidel Castro and all those comrades who fought and are fighting for the revolutionary cause of Socialism.
On this occasion,  people's economist Dr. Jaya Mehta from Joshi-Adhikari Institute of Social Studies, Delhi, Vineet Tiwari, senior CPI leader Com. Vasant Shintre, Vijay Dalal, Arvind Porwal, Chunnilal Wadhwani and others shared their thoughts. We also listened Pete Seeger's songs and watched videos about life and works of Com. Fidel Castro. Gen. Secretary of Progressive Vineet Tiwari recited his poem on Cuba. Young comrades of Indian People's Theatre Association (IPTA), Pooja, Sakshi and Raaj cut the cake. State Secretary of National Federation of Indian Women (NFIW) Com. Sarika Shrivastava, Indore Secretary Com. Neha Dubey, Com. Shaila Shintre, Bank trade unionists Com. Arvind Porwal, Com. Brajesh Kanungo, Com. Toufeeq from Progressive Writers Association (PWA), IPTA comrades Seema Rajoria from Ashoknagar and Anuradha Tiwari, Com. Dashrath from CPI were also among the ones who celebrated 90th Birthday of Com. Fidel Castro at OCC home of Bank Officers Association. This was an initiative of Sandarbh Collective which also observed Com. Fidel Castro's 80th Birthday in Indore in 2006 and was reported in Granma. Amir Khan and Nitin Bedarkar facilitated the show of visuals and songs for this occasion.

इतिहास ने फ़िदेल को सही साबित कियाः

फ़िदेल कास्त्रो का 90वाँ जन्मदिन
. सारिका श्रीवास्तव
इं
दौर (मध्य प्रदेश) के प्रगतिशील विचारधारा के साथियों ने 13 अगस्त 2016 को लैटिन अमेरिका के समाजवादी देश क्यूबा के राष्ट्रपति रहे काॅमरेड फिदेल काॅस्त्रो के 90वें जन्मदिन पर उनके जीवन, क्यूबाई क्रान्ति और समाजवाद पर अनेक बातें साझा कीं साथ ही क्यूबा का क्रान्तिकारी संगीत भी सुना।

काॅ. विनीत तिवारी की क्यूबा पर आधारित कविता ‘ज़रूरत’ से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। भूमिका रखते हुए डाॅ. जया मेहता ने भारतीय जन नाट्य संघ के युवा और किशोर साथियों को क्यूबा और फिदेल कास्त्रो के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि क्यूबा, अमेरिका से लगा हुआ एक छोटा सा देश है जिस पर पहले अमेरिका के पिट्ठू तानाशाह बटिस्टा का शासन था। वहां केवल गन्ने की खेती होती थी जो स्थानीय लोगों की ज़रूरत पूरा करने के बजाय अमेरिका निर्यात कर दी जाती थी। तब फिदेल कास्त्रो, उनके साथी अर्जेंटीना के चे ग्वेरा और उनके तमाम अन्य क्रांतिकारी साथियों ने बटिस्टा के शासन के विरुद्ध लोकतंत्र के लिए सिएरा मैस्ट्रा की पहाड़ियों पर गोरिल्ला युद्ध करके क्यूबा को आज़ाद करवाया। आज लैटिन अमेरिका के अन्य देश, जिनकी व्यायसायिक और प्राकृतिक संपदा का शोषण भी अमेरिका करता रहा है, एक-एक कर अमेरिका के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं और समाजवाद की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

क्यूबा की क्रान्ति को याद करते हुए उन्होंने कहा कि क्यूबा ने जिस तरह पूंजीवाद के खिलाफ संघर्ष कर अपनी आजादी हासिल की और सही मायनों में आज़ादी को आगेू बढ़ाया, वोे तीसरी दुनिया के मुल्कों के लिए एक मिसाल है। 

हमने चे ग्वेरा को भी याद किया की उन्होंने किस तरह समाजवादी क्यूबा में एक नए तरह के समाज को बनाकर स्थापना करने में अपना योगदान दिया। फिदेल केवल क्यूबा की जनता के लिए ही क्रान्तिकारी चमत्कारिक नेतृत्वकारी ही नहीं हैं बल्कि वे एक चमकते हुए प्रकाशपुंज की तरह समूची तीसरी दुनिया चाहे वह मोजाम्बिक और अंगोला हो या भारत और नेपाल हो या निकारागुआ या एल सल्वाडोर या बोलिविया या एक्वाडोर या फिर वेनेजुएला वे सबके लिए प्रेरणादायक हैं। 

जब सोवियत यूनियन और पूर्वी योरप के देशों में समाजवादी व्यवस्थाएँ ढह रही थीं और सीएमईए जैसी वैश्विक वैकल्पिक अर्थव्यवस्था का प्रभाव क्षीण हो रहा था, वो दौर क्यूबा के लिए बहुत ही कठिन था। लेकिन तब फिदेल ने अपने देश की जनता को संदेश दिया कि ‘‘इतिहास ने हमें ये ज़िम्मेदारी सौंपी है कि हम समाजवादी क्रान्ति को आगे बढ़ाएँ।’’ क्यूबा ने अनेक सख्त उपाय किये, ख़ुद फिदेल कास्त्रो ने 60 वर्ष से ज़्यादा की उम्र में साइकल चलाना सीखा क्योंकि सोवियत संघ से आने वाला तेल बंद हो गया था, अनेक सुविधाओं में कटौती की लेकिन अपने देश के नागरिकों की भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक रोज़गार की मूलभूत सुविधाओं को बरकरार रखा। क्यूबा सारी विपरीत परिस्तिथियों का सामना करते हुए संकट से निकला और इस पूरे दौर में सुदृढ़ नेतृत्व किया फ़िदेल कास्त्रो ने। इसीलिए समाजवाद की इच्छा रखने वाले दुनिया के करोड़ों-अरबों लोगों के दिलों में क्यूबा और फ़िदेल का स्थान बहुत ही विशिष्ट है। 

जया मेहता ने बताया कि सोवियत संघ के विघटन के बाद क्युूबा गए भारतीय पत्रकार सईद नकवी ने फिदेल कास्त्रो से एक इंटरव्यू में पूछा कि जब दुनिया के सारे मुल्कों ने समाजवाद को नकार दिया है तो ऐसे में केवल क्यूबा में समाजवाद पर डटे रहना क्या आपको गलत नहीं लगता। जवाब में फ़िदेल ने कहा कि सही और कामयाब होने में अंतर होता है। भले ही दुनिया में वर्तमान में समाजवाद नाकाम होता लग रहा हो लेकिन उससे वह ग़लत साबित नहीं हो जाता। यहीं फ़िदेल के उस ऐतिहासिक व विश्वप्रसिद्ध भाषण की भी याद की गई जिसमें उन्होंने अदालत में कहा था कि ‘आपका कानून भले ही मुझे गलत और गुनहगार ठहराये, इतिहास मुझे सही साबित करेगा।’

क्यूबा की जनता ने वेनेजुएला, बोलिविया, इक्वेडोर और लैटिन अमेरिका के अन्य देशों के लिए लोकतांत्रिक भागीदारी और पूँजीवाद से अलग एक नये किस्म के बराबरी पर आधारित मानव समाज का परिदृश्य सामने रखा। इससे प्रभावित होकर अनेक देशों में पूँजीवाद और अमेरिकी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ आंदोलन उठे और मजबूत हुए। क्यूबा ने न केवल अपने देश को सँवारा बल्कि सारी दुनिया में मानवता की मिसालें कायम कीं। क्यूबा के चिकित्सक दुनिया के हर कोने में किसी भी आपदा से निपटने के लिए हरपल तैयार रहते हैं।
कॅामरेड विनीत ने बताया कि जब पूरा देश ग़ुलामी के नारकीय जीवन को झेल रहा था तब फिदेल ने होसे मार्ती जैसे क्रांतिकारी कवि को समूचे लैटिन अमेरिका के सर्वाधिक सम्मानित कवि की प्रतिष्ठा दी। ‘ग्वांतानामेरा’ जैसा प्रेमगीत अँधेरे में उम्मीद की रोशनी बिखेरने वाले गीत की तरह दुनियाभर में प्रसिद्ध हुआ। महान गायक पीट सीजर ने इसकी धुन बनाई और गाया। आज यह दुनिया के अमर गीतों में एक है। उपस्थित लोगों ने इस गीत को गाते पीट सीजर के वीडियो को भी देखा। नोबल पुरस्कार प्राप्त कोलंबिया के साहित्यकार गेब्रियल गार्सिया माक्र्वेज़ पर एक वीडियो दिखाते हुए विनीत ने बताया कि फिदेल और मार्क्वेज़ बहुत अच्छे दोस्त भी थे। मार्क्वेज़ अपनी लिखी किताबों की पहली पांडुलिपि सबसे पहले फिदेल को ही पढ़वाते थे।

संदर्भ केन्द्र की पहल पर हुए इस कार्यक्रम में भारतीय महिला फेडरेशन, प्रगतिशील लेखक संघ, इप्टा, रूपांकन, बैंक ट्रेड यूनियनों व अन्य संगठनों के साथियों ने शिरकत की। धेनु मार्केट स्थित म. प्र. बैंक आॅफिसर्स एसोसिएशन के दफ्तर ओ.सी.सी. होम में आयोजित कॅामरेड वसंत शिंत्रे, शैला शिंत्रे, अरविंद पोरवाल, विजय दलाल, दशरथ पवार, चुन्नीलाल वाधवानी, ब्रजेश कानूनगो, सीमा राजोरिया (अशोकनगर), सारिका श्रीवास्तव, नेहा दुबे, प्रकाश जैन, अनुराधा तिवारी, राज लोगरे, तौफीक गौरी, पूजा सेरोके, साक्षी सोलंकी इत्यादि साथी शरीक हुए। आमिर खान व नितिन बेदरकर ने फ़िदेल कास्त्रो के जीवन और क्यूबा के संगीत से परिचित करवाने वाले वीडियो प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाए।