Sunday, May 21, 2017

'नटसम्राट' वही जयंत कर सकता है, जिसके पास आलाेक हाे

- अख्तर अली 
रायपुर|  जयंत देशमुख जैसे कल्पनाशील निर्देशक आैर आलाेक चटर्जी जैसे सक्षम अभिनेता मंच पर हाे ताे दर्शकाे की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है, आपकाे बीस प्रतिशत अतिरिक्त चौकन्ना रहना हाेता है, वरना मंच पर अगले क्षण हाेने वाले चमत्कार से आप वंचित हाे जायेगे, लेखक दृारा गढ़े गये किरदार काे जिस अंदाज़ मे जयंत तराशते है, वह कशीदाकारी की तरह हाेता है, जयंत पाञ नही आभूषण गढ़ते है | 

कहा जाता है कि रंगमंच अभिनेता का माध्यम है लेकिन जयंत देशमुख तकनीशियनाे काे भी अभिनेता के समकक्ष खड़ा कर देते है, आैर वह भी एैसी महीन कारीगरी के साथ कि एैसी धारणा विकसित हाे जाती है कि तकनीशियन न हाे ताे पाञ अधूरा है | जयंत नेपथ्य काे मंच पर स्थापित करते है |

नट सम्राट भोपाल मे तैयार किया गया नाटक है | देश के रंगकर्म मे इन दिनाे भोपाल का नाम काफ़ी सम्मान से लिया जा रहा है, यह शहर रंगमंच की बड़ी मंड़ी के रूप मे उभर रहा है | संजय उपाध्याय का " आनंद रघुनंदन " , नज़ीर कुरैशी का "तुगलक" आैर अब जयंत देशमुख का "नट सम्राट " ने नाटय रसिकाे आैर रंग समीक्षकाे का ध्यान भोपाल पर केन्द्रित कर दिया है |


कमज़ाेर आलेख पर बेहतर काम नही किया जा सकता, अभिनेता सक्षम न हाे ताे निर्देशक उसके अंदर से क्या निकाल पायेगा ? नट सम्राट मे जयंत देशमुख के एक हाथ मे बेहद कसावट भरी स्कृप्ट है आैर दूसरे हाथ मे दक्ष अभिनेताओं की टाेली, दमखम वाला नेपथ्य अतिरिक्त बाेनस अंक है | इस तरह के नायाब हीरे माेती काे छाट कर जमा करने वाले जौहरी है जयंत देशमुख | नाटक की कास्टिंग उसका भविष्य तय कर देती है, काबिल निर्देशक इस दिन जितने चाैकन्ने हाेते है उतना ताे वे मंचन के दिन भी नही हाेते, क्याेकि मंचन के दिन तक ताे उनका काम खत्म हाे चुका हाेता है |


नट सम्राट का लेखन आदर्श नाटय लेखन है, क्याेकि कथ्य मे कसावट के साथ मंच के अनुरूप बेहतरीन शिल्प की गुंजाइश लेखक ने निर्देशक के लिये छाेड़ रखी है | दृश्याे की संरचना इस तरह की गई है जिसमे मंच का सौंदर्य कलात्मकता के साथ समा जाता है | 


एक रंगकर्मी के जीवन पर आधारित यह नाटय आलेख एक शाेक गीत है, एक मर्सिया है, हर अभिनेता इस भूमिका मे स्वीकार नही हाे सकता, इसके लिये वही अभिनेता चाहिये जिसके पास वर्षाे की साधना हाे | आज रायपुर मे आयाेजित चार दिवसीय रंग जयंत की प्रथम संध्या काे यह नाटक "नट सम्राट देखने का अवसर मिला | शिरवाडकर जी की कलम से निकला यह बहुचर्चित बहुप्रशंसित नाटक जिसका अनुवाद सच्चिदानंद जाेशी जी ने किया है, हिन्दी मे पहली बार किया जा रहा है , एैसा नही है कि किसी ने भी इसे करना नही चाहा हाेगा, लेकिन हर स्कृप्ट हर ड़ायरेक्टर नही कर सकता, इसे रंगमंच का वही जयंत कर सकता है जिसके पास आलाेक हाे |एक बात आैर जयंत आैर आलाेक की जाेड़ी काे जब तक सुभाष मिश्र जैसे आयाेजक नही मिले तब तक यह याञा पूर्ण नही हाेती |

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