Tuesday, September 10, 2013

मकड़जाल : नाट्यालेख

-राकेश

पात्र
1- पूंजीपति, 2- सूत्रधार, 3- किसान, 4-लड़की, 5-संविदा कर्मचारी, 6- छात्र,
7-पब्लिक सेक्टर कर्मचारी, 8- सेल्स इक्जीक्यूटिन

(सारे पात्र एक किनारे पर लाइन से खड़े है, पूंजीपति काल्पनिक अथवा असली गेंदनुमा ग्लोब को हवा में उछाल कर कैच करता है फिर मंच के केन्द्र में आ कर पैर से ग्लोब को बहुत दूर हवा में उछाल देता है। केन्द्र में खड़ा होकर काल्पनिक रस्सी का एक फन्दा किसान की ओर उछालता है किसान उसे खुशी से पहनता है। पूंजीपति किसान को अपनी तरफ खींचता है, फिर एक तरफ खड़ा कर देता है। इसी तरह सारे पात्र पूंजीपति द्वारा फेंके गये फन्दे को खुशी-खुशी पहनते है और फिर उसके इशारे पर उसके चारों ओर खड़े हो जाते है। दूसरी बार पूंजीपति किसान की ओर मोबाइल, सेल्स इक्जीक्यूटिव की तरफ लैपटॉप, लड़की की तरफ सौन्दर्य प्रसाधन, संविदा कर्मचारी की तरफ कार, छात्र की तरफ मोटर साइकिल, पब्लिक सेक्टर कर्मचारी की तरफ सेन्सेक्स का फन्दा फेंकता है, फन्दे में फंसते ही सारे पात्र एक साथ बोलते है) -सेन्सेक्स ..

(पूंजीपति पब्लिक सेक्टर कर्मचारी को अपनी तरफ खींचता है) पब्लिक सेक्टर कर्मचारी- (ऊपर की ओर देखता हुआ) चौदह हजार, सोलह हजार, अठ्ठारह हजार (पूंजीपति छींकता है) पब्लिक सेक्टर कर्मचारी (अपने स्थान पर वापस लौटते हुए) सत्रह हजार, पन्द्रह हजार, तेरह हजार..

(पूंजीपति मोटर साइकिल चलाने का अभिनय कर रहे छात्र को काल्पनिक रस्सी से खींच कर मंच के अग्रभाग में दाहिनी ओर खड़ा करता है, साथ ही लड़की को भी काल्पनिक रस्सी के सहारे खींचता है जो कैट वाक करती हुई पूंजीपति के इशारे पर छात्र के कंधे पर हाथ रखकर खड़ी हो जाती है तथा पूंजीपति को पास आने का निमंत्रण देती है जो खींच कर छात्र को दूसरी तरफ कर देता है साथ ही कार चलाने का अभिनय कर रहे संविदा कर्मचारी की रस्सी को भी खींच देता है, पूंजीपति लड़की की ओर बढ़ता है तथा साथ ही मोटर साइकिल चला रहे छात्र एवं कार चला रहे संविदा कर्मचारी तेजी से एक दूसरे से भिड़ जाते हैं। पूंजीपति अपने स्थान पर लौटता है और केन्द्र में खड़ा हो कर एक तरफ के पात्र की तरफ बैट और दूसरे पात्र की ओर गेंद उछालता है। गेंद वाला पात्र गेंद फेंकता है, बल्लेबाज तेजी से बल्ला घुमाता है, सारे पात्र गेंद को ऊपर जाते हुए देखते हैं, पूंजीपति हाथ उठाकर छक्के का इशारा करता है, सारे पात्र आईपीएल के नृत्य के अन्दाज में नृत्य करते है। नृत्य समाप्त होते ही पंूजीपति सारे पात्रों को काल्पनिक रस्सी के सहारे गोलाकार घुमाता है फिर रस्सी को छोड़कर धीरे-धीरे बाहर निकल जाता है, सभी पात्र एक चक्कर लगा कर अपने-अपने स्थानों पर खड़े हो जाते है।)

(सूत्रधार का प्रवेश)

सूत्रधार - (पात्रों के पास जाने की कोशिश में जाल की रस्सियों से टकराता है) कैसा जाल है यह, पारदर्शी, महीन और चमकदार
लड़की - जाल नहीं प्यास है यह
सारे पात्र - जाल नहीं प्यास है यह
लड़की - प्यास को जरा बढ़ा के तो देखो
सारे पात्र - प्यास को जरा बढ़ा के तो देखो
सूत्रधार - प्यास! प्यास तो सचमुच लगी है पर पानी कहाँ है।
लड़की - प्यास नहीं तूफान है यह।
सारे पात्र - प्यास नहीं तूफान है यह।
लड़की - तूफां को होंठों से लगा के तो देखो।
सारे पात्र - तूफां को होंठों से लगा के तो देखो।

कोरस :
फन्दा बहुत हसीन है,
सपनों का मायाजाल.........2
ऊँची यहाँ दुकानें,
ऊँची यहाँ उड़ानें
ट्वन्टी फोर इन्टु सेविन,
बाजार के तरानें।
एफडीआई की धुन पर,
यह नाचता कमाल
फन्दा बहुत हसीन है..........2
यह चौड़ी-चौड़ी सड़कें,
हूटर बजाती मोटर।
आदमी है क्या यहाँ,
बस पांच साला वोटर।
एक वोट का ही धन है,
वैसे तो फटे हाल।
फन्दा बहुत हसीन है............2

सूत्रधार - (सारे पात्रों के पास जाने की कोशिश में जाल की रस्सियों से टकराता है) इतने सारे लोग इस जाल में फंसे है, क्या यह अपने आस-पास पड़े इन फन्दों को देख पा रहे है। चलिये इन्ही से पूछता हूँ (जाल से बचते हुए किसान के पास जाता है) किसान से कौन हो भाई तुम?
किसान - मैं एक किसान हूँ। फसल बेचने शहर जा रहा हूँ।
सूत्रधार - तुम इस जाल में कैसे फंस गये?
किसान - कौन सा जाल, कैसा जाल
सूत्रधार - तुम्हारे आस-पास जो यह पारदर्शी, महीन और चमकदार फन्दा है क्या तुम इसे देख नहीं पा रहे हो।
किसान - यह फन्दा नहीं भाई सुनहरे सपनों की डोर है यह देखो यह किसान क्रेडिट कार्ड और यह हरियाली का कार्ड।
सूत्रधार - हरियाली?
किसान - हाँ जैसे तुम्हारे शहर का मॉल, जहाँ एक साथ सारा सामान मिल जाता है।
सूत्रधार - पर यह जो तुम्हारी गर्दन के आस-पास फन्दा पड़ा है ।
किसान - फिर फन्दा, बौरहे हो क्या, यह मेरी जमीन की डील के कागजात है
सूत्रधार - जमीन की डील?
किसान - हाँ जो यहाँ से वहाँ तक जमीनें देख रहे हो यह मेरी ही हैं और अब यहाँ एक नया शहर बनने जा रहा है भला सा नाम है उसका हाई-हाई.......
सूत्रधार - हाईटेक सिटी
किसान - हाँ हाँ वही मुझे मेरी जमीन का मुआवजा मिलेगा उसे मैं दनादन बैंक में जमा करूँगा।
सूत्रधार - दनादन बैंक?
किसान - हाँ नये जमाने का बैंक है, खचाड़ा सरकारी बैंकों की तरह नहीं, तीन महीने में पैसा दुगुना करने की गारण्टी (सपना देखता हुआ सा) फिर मैं लड़के को बड़े स्कूल में पढ़ाऊंगा, बेटी की धूमधाम से शादी करूँगा, बूढ़े माँ बाप का इलाज कराऊंगा।

सूत्रधार - कितना भोला है यह किसान काश इसे पता होता कि यह जाल उसके गाँव के पोखर से लेकर नदियों और समुद्रों तक फैला है। किसान की जमीन से लेकर आदिवासियों के जंगल तक इसकी जद में हैं। (संविदा कर्मचारी की ओर जाता है) कौन हो भाई तुम?

संविदा कर्मचारी - मैं संविदा कर्मचारी हूँ।
सूत्रधार - तुम किस जाल में फँस गये हो?
संविदा कर्मचारी - सुबह 8 बजे का आया हूँ, रात के 8 बज गये है, काम अभी पूरा नहीं हुआ और काम पूरा नहीं हुआ तो कल से छुट्टी। काम पूरा करुँ की जाल देखूँ।
सूत्रधार - तुम समझ नहीं रहे हो, तुम्हें तुम्हारे काम के घण्टों का, न्यूनतम वेतन, प्राविडेन्ट फण्ड ईएसआई का अधिकार नहीं मिल रहा है, तुम शोषण के जाल में फंसे हो। तुम्हें अपने.......
संविदा कर्मचारी - (बीच में काट कर) भाषण सुनने का टाइम नहीं भाई, मुझे मेरा काम पूरा करने दो। मुझे सांस लेने की फुर्सत नहीं।

सूत्रधार - अजीब आदमी है, दस्तखत करता है 10 हजार पर पाता है पांच हजार पर इसे इस जाल को देखने की फुर्सत नहीं। चलो दूसरे से पूछता हूँ, कौन हो भाई तुम?।

सेल्स इक्जीक्यूटिव - आपको क्या चाहिये, क्रेडिट कार्ड, स्कूटर लोन, कार लोन, हाउसिंग लोन, मैरिज लोन, कन्ज्यूमर लोन, मेडिकल लोन, एजूकेशन लोन।
सूत्रधार - नहीं मुझे कोई लोन नहीं चाहिए मैने पूछा................
सेल्स इक्जीक्यूटिव - (बीच में काट कर) आपको इन्वेस्ट करना है। शेर, म्युचुअल फण्ड, इंश्योरेन्स और सबसे अच्छा इन्वेस्टमेन्ट दनादन बैंक तीन महीने में दो गुने की गारण्टी।
सूत्रधार - मुझे न लोन लेना है न इन्वेस्ट करना है मैंने सिर्फ इतना पूछा तुम हो कौन?
सेल्स इक्जीक्यूटिव - मैं जेसीएसपी कम्पनी का सेल्स इक्जीक्यूटिव हूँ। मल्टीनेशनल कम्पनी है, हमारी कम्पनी का शेयर दिन दूना रात चौगुना चढ़ रहा है।
सूत्रधार - पर इस कम्पनी का नाम तो कभी सुना नहीं। जेसीएसपी कम्पनी, इसका फुल फार्म क्या है?
सेल्स इक्जीक्यूटिव - जो चाहो सो पाओ कम्पनी, एक कम्पनी में 3735 पोर्ट फोलियो। अब बताइये आप लोन लेंगे या इन्वेस्ट करेंगे।
सूत्रधार - मुझे न लोन लेना है न इन्वेस्ट करना है। मैं सिर्फ इतना जानना चाहता हूँ तुम इस जाल में कैसे फंस गये?
सेल्स इक्जीक्यूटिव - कौन सा जाल, कैसा जाल?
सूत्रधार - हैरत है, तुम अपने आस-पास पड़े फन्दे को नहीं देख पा रहे हो?
सेल्स इक्जीक्यूटिव - फन्दा नहीं भाई, यह पोर्ट फोलियो है यह लोन का, यह शेयर मार्केट का यह वायदा कारोबार का।
सूत्रधार - और यह जो तुम्हारी गर्दन के आस-पास फन्दा है?
सेल्स इक्जीक्यूटिव - अरे भले आदमी फन्दा नहीं है यह तो योग का, भक्ति का अनुष्ठान का पोर्ट फोलियो है। थकान हो, टेंशन हो, डायबिटीज या ब्लड प्रेशर सब गायब। योग गुरु की जय बापू महाराज की जय। श्री श्री श्री श्री श्री सन्त की जय। (सारे पात्र जय बोलते है।)

सूत्रधार - अरे यह तो ध्यान लगाकर बैठ गया, काश इसे पता होता है कि यह जाल इसके ड्राइंग रुम से इराक के तेलकुओं तक फैला है, दिमाग से आत्मा तक की खरीद फरोख्त हो रही है। चलो इन मोहतरमा से पूछता हूँ। कौन हो तुम?

लड़की - मुझे नहीं जानते मैं बाजार की ब्राण्ड एम्बेसडर हूँ। ब्लेड हो, शेविंग क्रीम शैम्पू, क्रीम या डीओ, फ्रीज, टीवी, मोटरसाइकिल या कार। मेरे धम पर चलता है बाजार।
सूत्रधार - लेकिन तुम ही जाल में कैसे फंस गयी?
लड़की - कौन सा जाल, कैसा जाल।
सूत्रधार - तुम अपने आस-पास पड़े फन्दे को नहीं देख पा रही हो क्या?
लड़की - यह फन्दा नहीं मिस इण्डिया की सीढ़ी है। (सपना देखती हुई) मिस इण्डिया, मिस वर्ल्ड, मिस यूनीवर्स और फिर रुपहले पर्दे पर (सारे पात्र आकर ऑटोग्राफ के लिए हाथ आगे करते है।)

सूत्रधार - अरे यह तो सपने में है और इसके सपने में हैं जीरो फिगर, सिनेमा का रुपहला पर्दा काश इसके सपने में पितृ सत्ता, यौन हिंसा और उत्पीड़न से मुक्ति की चाहत होती। चलो दूसरे से पूछता हूँ। कौन हो भाई तुम (छात्र लैपटॉप पर काम करते हुये उसकी तरफ देखता नहीं)

सूत्रधार - मैंने पूछा तुम कौन हो भाई?
छात्र - स्टूडेन्ट हूँ।
सूत्रधार - तुम इस जाल में कैसे फंस गये?
छात्र - जाल नहीं यह मेरा आखिरी प्रोजेक्ट है।
सूत्रधार - प्रोजेक्ट क्या है?
छात्र - कृषि क्षेत्र को एफडीआई से होने वाले फायदे और नुकसान। 5000 से ज्यादा किसानों का सैम्पुल सर्वे है।
सूत्रधार - नतीजा क्या है?
छात्र - एफडीआई से किसानों को बहुत फायदा होने वाला है और मेरा ग्रेडेशन भी ।़ होगा।
सूत्रधार - तुम पढ़ते कहाँ हो?
छात्र - आईआईएमपीडी कॉलेज मंे।
सूत्रधार - इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेन्ट, प्लानिंग एण्ड डेवेलपमेन्ट, इसकी फीस तो बहुत ज्यादा है।
छात्र - जेसीएसपी कम्पनी ने एजूकेशन लोन दिलाया 30 लाख, 30 से 35 लाख तक का पैकेज मिलेगा, 1 साल में एजूकेशन लोन अदा कर दूंगा अगले साल गाड़ी, तीसरे साल मकान और फिर..............

सूत्रधार - यहाँ तो हर कोई सपने में है चलो इन साहब से पूछता हूँ। कौन है भाई आप?
पब्लिक सेक्टर कर्मचारी - मैं पब्लिक सेक्टर का कर्मचारी हूँ।
सूत्रधार - कर्मचारी मतलब मजदूर।
पब्लिक सेक्टर कर्मचारी - कैसी बातें करते है, मजदूर तो वह होते है जो दिहाड़ी पर काम करते है, हाथ पैर से काम करते है मतलब दिमागी काम नहीं करते। मैं बाबू हूँ और जल्दी अफसर बनने वाला हूँ।
सूत्रधार - आप इस जाल में कैसे फंस गये।
पब्लिक सेक्टर कर्मचारी - आप इनकी बात कर रहें है, भूमण्डलीयकरण, उदारीकरण, निजीकरण वगैरह-वगैरह की न।
सूत्रधार - जी बिल्कुल
पब्लिक सेक्टर कर्मचारी - मैं इन सब चीजों के बारे में जानता हूँ हमारे यहाँ हड़ताले होती हैं लेकिन यह रुकने वाला नहीं है। यूनियनें लड़ रही है पर मुझे इससे क्या, मैं अपने काम से काम रखता हूँ मैं अपना प्रोमोशन देखूँ या जाल देखूँ।
सूत्रधार - आप समझ ही गये होंगे कि यह मकड़ जाल है। आप यह भी समझ गये होंगे कि इसे बुनने वाला कौन है और फंसने वाले कौन? आपने कभी मकड़े को जाल बुनते देखा है। वह बहुत होशियारी और चालाकी से एक जाल बुनता है। जाल बुनकर वह अपनी मांद में लौट जाता है और फिर आराम से किसी कीड़े या मक्खी के फँसने का इन्तजार करता है, जैसे ही कोई छोटा मोटर कीड़ा या मक्खी जाल में आकर फंसती है मांद में बैठा मकड़ा धीमे-धीमे बाहर निकलता है, मक्खी जाल से निकलने की जितना भी कोशिश करती है और फंसती जाती है। मकड़ा जाल के सहारे ही दबे पांव मक्खी के पास पहुंचता है और अपना खूनी पंजा उस पर गड़ा देता है, उसका खून चूसता है, वापस मांद में लौट जाता है, वह फिर आता है और तब तक मक्खी का खून चूसता रहता है जब तक वह अपना दम नहीं तोड़ देती। वह एक दो तीन सैकड़ो मक्खियों का खून चूसता रहता है। परजीवी मकड़ा एक मक्खियाँ अनेक लेकिन जाल में फंसी हुई।

(पूंजीपति धीमी गति से मकड़े के अन्दाज में सभी पात्रों का खून चूसता है जो छटपटाते है)

पूंजीपति - ऐ इधर आओ तुम लोगों को बहकाने की कोशिश क्यों कर रहे हो?
सूत्रधार - बहकाने की ...... मैं लोगों को सच बता रहा हूँ।
पूंजीपति - तुम विकास को जाल कहते हो फन्दा कहते हो देखते नहीं जिस देश में अभी कुछ साल पहले तक टेलीफोन के लिए लाइन लगानी पड़ती थी आज रिक्शे वाले के पास भी मोबाईल है। चमचमाती गाड़ियाँ है, आठ लेन की चौड़ी सड़के है। माल है, मल्टीप्लेक्स है सैकड़ों चैनल, उंगली के इशारे पर पूरी दुनियाँ तुम्हारे सामने। तुम्हारी जरुरत ऐशोआराम का हर सामान और तुम्हारे जैसे पागल इसे फन्दा कहते है।
सूत्रधार - लेकिन देश के अस्सी फीसदी लोग 20 रु0 रोजाना पर बसर कर रहे हैं अशिक्षा है, बेरोजगारी है भुखमरी है, कुपोषण है। देखो जरा जाल में फंसे इन लोगों की हालत (मकड़ा एक एक करके खून चूसता जाता है)

किसान - मेरी जमीन चली गयी। जिस बैंक में पैसा जमा किया था वह भगोड़ा निकला। (गले में फन्दा लगाता है।)
छात्र - बड़े इंस्टीट्यूट से एमबीए के बाद भी नौकरी नहीं
लड़की - मैं देह के सहारे मुक्ति का सपना तलाश रही थी पर मैं....... (रोते-रोते बैठ जाती है।)
सेल्स इक्जीक्यूटिव - सारे के सारे शेयर डूब गये। इंवेस्टमेन्ट कम्पनियाँ भाग गई मैं क्या करुँ (गले में फांसी का फन्दा लगाता)
संविदा कर्मचारी - नई सरकार आई नये ठेकेदार आ गये। मुझ समेत सारे पुराने कर्मचारी बाहरी हो गये है। (गले में फन्दा लगाता)
पब्लिक सेक्टर कर्मचारी - मेरी फैक्ट्री में 700 लोग काम करते थे, निजीकरण के बाद 700 रह गये है। काम का बोझ और वेतन में कटौती। श्रम कानूनो का पालन नहीं हो रहा है। (गले में फन्दा लगाता)

सूत्रधार - देखो जरा फन्दे में फंसे इन लोगों की हालत लड़कियाँ दरिन्दगी का शिकार बनायी जा रही है, किसान और मजदूर आत्महत्या कर रहे है।
पूंजीपति - हानि लाभ जीवन मरण यश-अपयश विधि हाथ। उसे न मैं बदल सकता हूँ न तुम लेकिन मैंने मरने वालों की सदगति के लिए बैकुण्ठ धाम का सुन्दरीकरण किया है। जो वहां एक बार जाता है बार-बार जाना रहता है।
सारे पात्र - आमीन
सूत्रधार - तुम मकड़े से भी घृणित मौत के सौदागर हो लेकिन अब तुम बच नहीं सकते, देखो लोग अब जाग रहे है।

किसान - फ सल का वाजिब दाम दो।
मेरी जमीन वापस करो।
संविदा कर्मचारी - ठेकेदारी प्रथा नहीं चलेगी
श्रम कानूनो का पालन हो।
न्यूनतम वेतन लेके रहेंगे।
लड़की - महिलाओं का उत्पीड़न बन्द करो
यौन हिंसा अब और नहीं
सेल्स इक्जीक्यूटिव - उदारीकरण धोखा है
निजीकरण धोखा है
एफडीआई धोखा है। (सारे पात्र नारे दोहराते है)

पूंजीपति - (जोर जोर से हंसता है) जब कभी यह जागने लगते है तो इन्हे फसाने नहीं नहीं लड़ाने का एक फन्दा और है मेरे पास (फेंकता है)यह सदियों पुराना परम्परा और धर्म का फन्दा और यह-यह लो पितृ सत्ता का फन्दा (सारे पात्र अभिनय करते हुए आपस में लड़ने लगते है)

सूत्रधार - अब आप ही बताइये इस जाल को तोड़ने का कोई रास्ता है?
सारे पात्र - आप ही बताइये इस जाल को तोड़ने का कोई रास्ता है?


कोरस :
फन्दा बहुत हसीन है,
सपनों का मायाजाल.........2
ऊँची यहाँ दुकानें,
ऊँची यहाँ उड़ानें
ट्वन्टी फोर इन्टु सेविन,
बाजार के तरानें।
एफडीआई की धुन पर,
यह नाचता कमाल
फन्दा बहुत हसीन है..........2
यह चौड़ी-चौड़ी सड़कें,
हूटर बजाती मोटर।
आदमी है क्या यहाँ,
बस पांच साला वोटर।
एक वोट का ही धन है,
वैसे तो फटे हाल।
फन्दा बहुत हसीन है............2

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